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Friday, September 19, 2014

ज्योतिष

जन्मान्तरकृतं पापं व्याधिरूपेण बाधते। 
तच्छान्तिरौषधैर्दानैर्जपहोमसुरार्चनै:  ॥ 
अर्थात पूर्व जन्ममें किया गया पापकर्म ही व्याधिके रूपमें हमारे शरीरमें उत्पन्न होकर कष्टकारक होता है तथा अौषध,दान,जप,होम तथा देवपूजासे रोग और बाधा की शान्ति होती है (हारीतसंहिता )