Search This Blog

Thursday, October 24, 2013

સમજણ

સુતેલા ને સંસાર મળે છે અને જાગેલા ને ભગવાન મળે છે 
                                (ડોંગરે મહારાજ ) 

Wednesday, October 23, 2013

गृहस्थोचित शिष्टाचार

अहिंसा सत्यवचनं सर्वभूतानुकम्पनम् | शमो दानं यथा शक्ति  गार्हस्थ्यो धर्म उत्तम:||
                          शुश्रुषन्ते ये पितरं मातरं च गृहाश्रमे ||
भर्तारं चॆव या नारी अग्निहोत्रं च ये द्विजा: | तेषु तेषु च प्रीणन्ति देवा इन्द्र पुरोगमा : ||
                         पितर: पितृलोकस्था: स्वधर्मेण स रज्यते |
यथा मातरमाश्रित्य सर्वे जीवन्ति जन्तव: | तथा गृहाश्रमं प्राप्य सर्वे जीवन्ति चाश्रमा:||
(भगवान महेश्वर पार्वतीजी से बोले ---देवी !)किसी भी जीव की हिंसा न करना , सत्य बोलना , सब प्राणियोंपर दया करना , मन और इन्द्रियोंपर काबू रखना तथा अपनी शक्ति के अनुसार दान देना गृहस्थ - आश्रम का उत्तम धर्म है । जो लोग गृहस्थाश्रम मे रहकर माता - पिता की सेवा करते है , जो नारी पति की सेवा करती है तथा जो ब्राह्मण नित्य अग्निहोत्र - कर्म करते है , उन सब पर इन्द्र आदि देवता , पितृलोक निवासी पितर प्रसन्न होते है एवं वह पुरुष अपने धर्म से आनन्दित होता है । जैसे सभी जीव माता का सहारा लेकर जीवन धारण करते है , उसी प्रकार सभी आश्रम गृहस्थ - आश्रम का आश्रय लेकर ही जीवन - यापन करते है । {महा० अनु०, अ० १४१ }

Monday, October 21, 2013

જય નિત્યાનંદ


હું અને જીગ્નેશ નવરાત્રી માં કાનનગઢ ગયા હતા તેના ફોટો






























Wednesday, September 18, 2013

पितृ पक्ष में श्राद्ध की महिमा

पितृ पक्ष में श्राद्ध की महिमा 
आयु: पुत्रान् यश: स्वर्ग कीर्ति पुष्टि बलं श्रियम् |
पशुन् सोख्यं धनं धान्यं प्राप्नुयात् पितृ पुजनात् ||
तथा 
आयु  प्रजां  धनं  वितं  स्वर्ग  मोक्षं  सुखानि च |
प्रयच्छन्ति तथा राज्यं प्रीता नृणां पितामहा :||
धर्मशास्त्रो में कहा गया हे कि पितरों को पिण्डदान करनेवाला गृहस्थ दीर्घायु , पुत्र - पौत्रादी , यश , स्वर्ग , पुष्टि , बल , लक्ष्मी , पशु , सुख - साधन तथा धन - धान्यादि की प्राप्ति करता है । यही नहीं पितरो की कृपा से ही उसे सब प्रकार की समृद्धी सोभाग्य राज्य तथा मोक्ष की प्राप्ति होती हे भाद्रपद कृष्ण पक्ष (आश्विन कृष्ण पक्ष ) पितृ पक्ष में पितरो को आशा लगी रहती हे की हमारे पुत्र - पौत्रादी हमें पिण्ड दान तथा तिलांन्जली प्रदान कर संतुष्ट करेंगे । यही आशा लेकर वे पितृलोक से पृथ्वी लोक पर आते हे पितृ पक्ष पितरो के लिये पर्व का समय हे अत एव इस पक्ष में श्राद्ध किया जाता हे १९ /९ /२०१३ से ४/१०/२०१३ तक 







Monday, September 16, 2013

પિતૃ વંદના

પિતૃ વંદના 
પુરાણો માં પણ પદ્મ પુરાણ નું વિશિષ્ટ સ્થાન છે ભગવાન વેદ વ્યાસ પદ્મ પુરાણ માં પિતૃ વંદના કરતાં કહે છે 
पिता धर्म: पिता स्वर्ग: पिता हि परमं तप: |
पितरि प्रीति मापन्ने प्रीयन्ते  सर्व देवता : ||
                              (पद्म पु सु ख 47/9)
પિતા ધર્મ છે , પિતા સ્વર્ગ છે અને પિતા જ સર્વોત્કૃષ્ટ તપસ્યા છે જેની સેવા અને સદગુણો થી દેવતા પણ પ્રિય રહે  છે

Friday, September 6, 2013

श्री भूरीबाई

चुप साधन चुप साध्य है, चुप चुप माहि समाय.
चुप समज्या री समझ है, समज्या चुप व्हे जाय.

Tuesday, September 3, 2013

श्लोक

आयुर्नश्यति पश्यतां प्रतिदिनं याति क्षयं योवनं |
प्रत्यायान्ति गता : पुनर्न दिवसा: कालो जगद्भक्षक ||
પ્રત્યેક પળે આયુષ્યનો નાશ થાય છે ફૂટેલો ઘડો હોય અને એમાંથી જેમ પાણી ટપક્યા કરે, તેમ પ્રત્યેક પળે આપણે મૃત્યુની વધારે નજીક જતા જઈએ છીએ