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Tuesday, February 20, 2018

शिव सहस्त्रनामावली

शिव सहस्त्रनामावली
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ऊँ स्थिराय नमः, ऊँ स्थाणवे नमः, ऊँ प्रभवे नमः, ऊँ भीमाय नमः, ऊँ प्रवराय नमः, ऊँ वरदाय नमः, ऊँ वराय नमः, ऊँ सर्वात्मने नमः, ऊँ सर्वविख्याताय नमः, ऊँ सर्वस्मै नमः ऊँ सर्वकाराय नमः, ऊँ भवाय नमः, ऊँ जटिने नमः, ऊँ चर्मिणे नमः,ऊँ शिखण्डिने नमः, ऊँ सर्वांङ्गाय नमः, ऊँ सर्वभावाय नमः, ऊँ हराय नमः, ऊँ हरिणाक्षाय नमः, ऊँ सर्वभूतहराय नमः ऊँ प्रभवे नमः, ऊँ प्रवृत्तये नमः, ऊँ निवृत्तये नमः, ऊँ नियताय नमः, ऊँ शाश्वताय नमः, ऊँ ध्रुवाय नमः, ऊँ श्मशानवासिने नमः, ऊँ भगवते नमः, ऊँ खेचराय नमः, ऊँ गोचराय नमः ऊँ अर्दनाय नमः, ऊँ अभिवाद्याय नमः, ऊँ महाकर्मणे नमः, ऊँ तपस्विने नमः, ऊँ भूतभावनाय नमः, ऊँ उन्मत्तवेषप्रच्छन्नाय नमः, ऊँ सर्वलोकप्रजापतये नमः, ऊँ महारूपाय नमः, ऊँ महाकायाय नमः, ऊँ वृषरूपाय नमः ऊँ महायशसे नमः, ऊँ महात्मने नमः, ऊँ सर्वभूतात्मने नमः, ऊँ विश्वरूपाय नमः, ऊँ महाहनवे नमः, ऊँ लोकपालाय नमः, ऊँ अंतर्हितात्मने नमः, ऊँ प्रसादाय नमः, ऊँ हयगर्दभाय नमः, ऊँ पवित्राय नमः(५०)

ऊँ महते नमः, ऊँ नियमाय नमः, ऊँ नियमाश्रिताय नमः, ऊँ सर्वकर्मणे नमः, ऊँ स्वयंभूताय नमः, ऊँ आदये नमः, ऊँ आदिकराय नमः, ऊँ निधये नमः, ऊँ सहस्राक्षाय नमः, ऊँ विशालाक्षाय नमः, ऊँ सोमाय नमः, ऊँ नक्षत्रसाधकाय नमः, ऊँ चंद्राय नमः, ऊँ सूर्याय नमः, ऊँ शनये नमः, ऊँ केतवे नमः, ऊँ ग्रहाय नमः, ऊँ ग्रहपतये नमः, ऊँ वराय नमः, ऊँ अत्रये नमः, ऊँ अत्र्यानमस्कर्त्रे नमः, ऊँ मृगबाणार्पणाय नमः, ऊँ अनघाय नमः,ऊँ महातपसे नमः, ऊँ घोरतपसे नमः, ऊँ अदीनाय नमः, ऊँ दीनसाधककराय नमः, ऊँ संवत्सरकराय नमः, ऊँ मंत्राय नमः, ऊँ प्रमाणाय नमः, ऊँ परमन्तपाय नमः, ऊँ योगिने नमः, ऊँ योज्याय नमः, ऊँ महाबीजाय नमः, ऊँ महारेतसे नमः, ऊँ महाबलाय नमः, ऊँ सुवर्णरेतसे नमः, ऊँ सर्वज्ञाय नमः, ऊँ सुबीजाय नमः, ऊँ बीजवाहनाय नमः, ऊँ दशबाहवे नमः, ऊँ अनिमिषाय नमः, ऊँ नीलकण्ठाय नमः, ऊँ उमापतये नमः, ऊँ विश्वरूपाय नमः, ऊँ स्वयंश्रेष्ठाय नमः, ऊँ बलवीराय नमः, ऊँ अबलोगणाय नमः, ऊँ गणकर्त्रे नमः, ऊँ गणपतये नमः (१००)

ऊँ दिग्वाससे नमः, ऊँ कामाय नमः, ऊँ मंत्रविदे नमः, ऊँ परममन्त्राय नमः, ऊँ सर्वभावकराय नमः, ऊँ हराय नमः, ऊँ कमण्डलुधराय नमः, ऊँ धन्विते नमः, ऊँ बाणहस्ताय नमः, ऊँ कपालवते नमः, ऊँ अशनिने नमः, ऊँ शतघ्निने नमः, ऊँ खड्गिने नमः, ऊँ पट्टिशिने नमः, ऊँ आयुधिने नमः, ऊँ महते नमः, ऊँ स्रुवहस्ताय नमः, ऊँ सुरूपाय नमः, ऊँ तेजसे नमः, ऊँ तेजस्करनिधये नमः ऊँ उष्णीषिणे नमः, ऊँ सुवक्त्राय नमः, ऊँ उदग्राय नमः, ऊँ विनताय नमः, ऊँ दीर्घाय नमः, ऊँ हरिकेशाय नमः, ऊँ सुतीर्थाय नमः, ऊँ कृष्णाय नमः, ऊँ श्रृगालरूपाय नमः,ऊँ सिद्धार्थाय नमः ऊँ मुण्डाय नमः, ऊँ सर्वशुभंकराय नमः, ऊँ अजाय नमः, ऊँ बहुरूपाय नमः, ऊँ गन्धधारिणे नमः, ऊँ कपर्दिने नमः, ऊँ उर्ध्वरेतसे नमः, ऊँ उर्ध्वलिंगाय नमः, ऊँ उर्ध्वशायिने नमः, ऊँ नभस्थलाय नमः, ऊँ त्रिजटाय नमः, ऊँ चीरवाससे नमः,ऊँ रूद्राय नमः, ऊँ सेनापतये नमः, ऊँ विभवे नमः, ऊँ अहश्चराय नमः, ऊँ नक्तंचराय नमः, ऊँ तिग्ममन्यवे नमः, ऊँ सुवर्चसाय नमः, ऊँ गजघ्ने नमः (१५०)

ऊँ दैत्यघ्ने नमः, ऊँ कालाय नमः, ऊँ लोकधात्रे नमः, ऊँ गुणाकराय नमः, ऊँ सिंहसार्दूलरूपाय नमः, ऊँ आर्द्रचर्माम्बराय नमः, ऊँ कालयोगिने नमः, ऊँ महानादाय नमः, ऊँ सर्वकामाय नमः, ऊँ चतुष्पथाय नमः, ऊँ निशाचराय नमः, ऊँ प्रेतचारिणे नमः, ऊँ भूतचारिणे नमः, ऊँ महेश्वराय नमः, ऊँ बहुभूताय नमः,ऊँ बहुधराय नमः, ऊँ स्वर्भानवे नमः, ऊँ अमिताय नमः, ऊँ गतये नमः, ऊँ नृत्यप्रियाय नमः, ऊँ नृत्यनर्ताय नमः, ऊँ नर्तकाय नमः, ऊँ सर्वलालसाय नमः, ऊँ घोराय नमः, ऊँ महातपसे नमः,ऊँ पाशाय नमः, ऊँ नित्याय नमः, ऊँ गिरिरूहाय नमः, ऊँ नभसे नमः, ऊँ सहस्रहस्ताय नमः, ऊँ विजयाय नमः, ऊँ व्यवसायाय नमः, ऊँ अतन्द्रियाय नमः, ऊँ अधर्षणाय नमः, ऊँ धर्षणात्मने नमः, ऊँ यज्ञघ्ने नमः, ऊँ कामनाशकाय नमः, ऊँ दक्षयागापहारिणे नमः, ऊँ सुसहाय नमः, ऊँ मध्यमाय नमः, ऊँ तेजोपहारिणे नमः, ऊँ बलघ्ने नमः, ऊँ मुदिताय नमः, ऊँ अर्थाय नमः, ऊँ अजिताय नमः, ऊँ अवराय नमः, ऊँ गम्भीरघोषाय नमः, ऊँ गम्भीराय नमः, ऊँ गंभीरबलवाहनाय नमः, ऊँ न्यग्रोधरूपाय नमः (२००)

ऊँ न्यग्रोधाय नमः, ऊँ वृक्षकर्णस्थितये नमः, ऊँ विभवे नमः, ऊँ सुतीक्ष्णदशनाय नमः, ऊँ महाकायाय नमः, ऊँ महाननाय नमः,ऊँ विश्वकसेनाय नमः, ऊँ हरये नमः, ऊँ यज्ञाय नमः, ऊँ संयुगापीडवाहनाय नमः, ऊँ तीक्ष्णतापाय नमः, ऊँ हर्यश्वाय नमः, ऊँ सहायाय नमः, ऊँ कर्मकालविदे नमः, ऊँ विष्णुप्रसादिताय नमः, ऊँ यज्ञाय नमः, ऊँ समुद्राय नमः, ऊँ वडमुखाय नमः, ऊँ हुताशनसहायाय नमः, ऊँ प्रशान्तात्मने नमः,ऊँ हुताशनाय नमः, ऊँ उग्रतेजसे नमः, ऊँ महातेजसे नमः, ऊँ जन्याय नमः, ऊँ विजयकालविदे नमः, ऊँ ज्योतिषामयनाय नमः, ऊँ सिद्धये नमः, ऊँ सर्वविग्रहाय नमः, ऊँ शिखिने नमः, ऊँ मुण्डिने नमः, ऊँ जटिने नमः, ऊँ ज्वालिने नमः, ऊँ मूर्तिजाय नमः, ऊँ मूर्ध्दगाय नमः, ऊँ बलिने नमः, ऊँ वेणविने नमः, ऊँ पणविने नमः, ऊँ तालिने नमः, ऊँ खलिने नमः, ऊँ कालकंटकाय नमः, ऊँ नक्षत्रविग्रहमतये नमः, ऊँ गुणबुद्धये नमः, ऊँ लयाय नमः, ऊँ अगमाय नमः, ऊँ प्रजापतये नमः, ऊँ विश्वबाहवे नमः,ऊँ विभागाय नमः, ऊँ सर्वगाय नमः, ऊँ अमुखाय नमः, ऊँ विमोचनाय नमः (२५०)

ऊँ सुसरणाय नमः, ऊँ हिरण्यकवचोद्भाय नमः, ऊँ मेढ्रजाय नमः,ऊँ बलचारिणे नमः, ऊँ महीचारिणे नमः, ऊँ स्रुत्याय नमः, ऊँ सर्वतूर्यनिनादिने नमः, ऊँ सर्वतोद्यपरिग्रहाय नमः, ऊँ व्यालरूपाय नमः, ऊँ गुहावासिने नमः, ऊँ गुहाय नमः, ऊँ मालिने नमः, ऊँ तरंगविदे नमः, ऊँ त्रिदशाय नमः, ऊँ त्रिकालधृगे नमः,ऊँ कर्मसर्वबन्ध–विमोचनाय नमः, ऊँ असुरेन्द्राणां बन्धनाय नमः, ऊँ युधि शत्रुवानाशिने नमः, ऊँ सांख्यप्रसादाय नमः, ऊँ दुर्वाससे नमः, ऊँ सर्वसाधुनिषेविताय नमः, ऊँ प्रस्कन्दनाय नमः, ऊँ विभागज्ञाय नमः, ऊँ अतुल्याय नमः, ऊँ यज्ञविभागविदे नमः, ऊँ सर्वचारिणे नमः, ऊँ सर्ववासाय नमः, ऊँ दुर्वाससे नमः,ऊँ वासवाय नमः, ऊँ अमराय नमः, ऊँ हैमाय नमः, ऊँ हेमकराय नमः, ऊँ अयज्ञसर्वधारिणे नमः, ऊँ धरोत्तमाय नमः, ऊँ लोहिताक्षाय नमः, ऊँ महाक्षाय नमः, ऊँ विजयाक्षाय नमः, ऊँ विशारदाय नमः, ऊँ संग्रहाय नमः, ऊँ निग्रहाय नमः, ऊँ कर्त्रे नमः, ऊँ सर्पचीरनिवसनाय नमः, ऊँ मुख्याय नमः, ऊँ अमुख्याय नमः, ऊँ देहाय नमः, ऊँ काहलये नमः, ऊँ सर्वकामदाय नमः, ऊँ सर्वकालप्रसादाय नमः, ऊँ सुबलाय नमः, ऊँ बलरूपधृगे नमः(३००)

ऊँ सर्वकामवराय नमः, ऊँ सर्वदाय नमः, ऊँ सर्वतोमुखाय नमः,ऊँ आकाशनिर्विरूपाय नमः, ऊँ निपातिने नमः, ऊँ अवशाय नमः,ऊँ खगाय नमः, ऊँ रौद्ररूपाय नमः, ऊँ अंशवे नमः, ऊँ आदित्याय नमः, ऊँ बहुरश्मये नमः, ऊँ सुवर्चसिने नमः, ऊँ वसुवेगाय नमः,ऊँ महावेगाय नमः, ऊँ मनोवेगाय नमः, ऊँ निशाचराय नमः, ऊँ सर्ववासिने नमः, ऊँ श्रियावासिने नमः, ऊँ उपदेशकराय नमः, ऊँ अकराय नमः, ऊँ मुनये नमः, ऊँ आत्मनिरालोकाय नमः, ऊँ संभग्नाय नमः, ऊँ सहस्रदाय नमः, ऊँ पक्षिणे नमः, ऊँ पक्षरूपाय नमः, ऊँ अतिदीप्ताय नमः, ऊँ विशाम्पतये नमः, ऊँ उन्मादाय नमः, ऊँ मदनाय नमः, ऊँ कामाय नमः, ऊँ अश्वत्थाय नमः, ऊँ अर्थकराय नमः, ऊँ यशसे नमः, ऊँ वामदेवाय नमः, ऊँ वामाय नमः, ऊँ प्राचे नमः, ऊँ दक्षिणाय नमः, ऊँ वामनाय नमः, ऊँ सिद्धयोगिने नमः, ऊँ महर्षये नमः, ऊँ सिद्धार्थाय नमः, ऊँ सिद्धसाधकाय नमः, ऊँ भिक्षवे नमः, ऊँ भिक्षुरूपाय नमः, ऊँ विपणाय नमः, ऊँ मृदवे नमः, ऊँ अव्ययाय नमः, ऊँ महासेनाय नमः, ऊँ विशाखाय नमः (३५०)

ऊँ षष्टिभागाय नमः, ऊँ गवाम्पतये नमः, ऊँ वज्रहस्ताय नमः,ऊँ विष्कम्भिने नमः, ऊँ चमुस्तंभनाय नमः, ऊँ वृत्तावृत्तकराय नमः, ऊँ तालाय नमः, ऊँ मधवे नमः, ऊँ मधुकलोचनाय नमः, ऊँ वाचस्पतये नमः, ऊँ वाजसनाय नमः, ऊँ नित्यमाश्रमपूजिताय नमः, ऊँ ब्रह्मचारिणे नमः, ऊँ लोकचारिणे नमः, ऊँ सर्वचारिणे नमः, ऊँ विचारविदे नमः, ऊँ ईशानाय नमः, ऊँ ईश्वराय नमः, ऊँ कालाय नमः, ऊँ निशाचारिणे नमः, ऊँ पिनाकधृगे नमः, ऊँ निमितस्थाय नमः, ऊँ निमित्ताय नमः, ऊँ नन्दये नमः, ऊँ नन्दिकराय नमः, ऊँ हरये नमः, ऊँ नन्दीश्वराय नमः, ऊँ नन्दिने नमः, ऊँ नन्दनाय नमः, ऊँ नंन्दीवर्धनाय नमः, ऊँ भगहारिणे नमः, ऊँ निहन्त्रे नमः, ऊँ कालाय नमः, ऊँ ब्रह्मणे नमः, ऊँ पितामहाय नमः, ऊँ चतुर्मुखाय नमः, ऊँ महालिंगाय नमः, ऊँ चारूलिंगाय नमः, ऊँ लिंगाध्यक्षाय नमः, ऊँ सुराध्यक्षाय नमः,ऊँ योगाध्यक्षाय नमः, ऊँ युगावहाय नमः, ऊँ बीजाध्यक्षाय नमः,ऊँ बीजकर्त्रे नमः, ऊँ अध्यात्मानुगताय नमः, ऊँ बलाय नमः, ऊँ इतिहासाय नमः, ऊँ सकल्पाय नमः, ऊँ गौतमाय नमः, ऊँ निशाकराय नमः (४००)  

ऊँ दम्भाय नमः, ऊँ अदम्भाय नमः, ऊँ वैदम्भाय नमः, ऊँ वश्याय नमः, ऊँ वशकराय नमः, ऊँ कलये नमः, ऊँ लोककर्त्रे नमः, ऊँ पशुपतये नमः, ऊँ महाकर्त्रे नमः, ऊँ अनौषधाय नमः, ऊँ अक्षराय नमः, ऊँ परब्रह्मणे नमः, ऊँ बलवते नमः, ऊँ शक्राय नमः, ऊँ नीतये नमः, ऊँ अनीतये नमः, ऊँ शुद्धात्मने नमः, ऊँ मान्याय नमः, ऊँ शुद्धाय नमः, ऊँ गतागताय नमः, ऊँ बहुप्रसादाय नमः, ऊँ सुस्पप्नाय नमः, ऊँ दर्पणाय नमः,ऊँ अमित्रजिते नमः, ऊँ वेदकराय नमः, ऊँ मंत्रकराय नमः, ऊँ विदुषे नमः, ऊँ समरमर्दनाय नमः, ऊँ महामेघनिवासिने नमः, ऊँ महाघोराय नमः, ऊँ वशिने नमः, ऊँ कराय नमः, ऊँ अग्निज्वालाय नमः, ऊँ महाज्वालाय नमः, ऊँ अतिधूम्राय नमः,ऊँ हुताय नमः, ऊँ हविषे नमः, ऊँ वृषणाय नमः, ऊँ शंकराय नमः,ऊँ नित्यंवर्चस्विने नमः, ऊँ धूमकेताय नमः, ऊँ नीलाय नमः, ऊँ अंगलुब्धाय नमः, ऊँ शोभनाय नमः, ऊँ निरवग्रहाय नमः, ऊँ स्वस्तिदायकाय नमः, ऊँ स्वस्तिभावाय नमः, ऊँ भागिने नमः,ऊँ भागकराय नमः, ऊँ लघवे नमः(४५०)

ऊँ उत्संगाय नमः, ऊँ महांगाय नमः, ऊँ महागर्भपरायणाय नमः, ऊँ कृष्णवर्णाय नमः,ऊँ सुवर्णाय नमः, ऊँ सर्वदेहिनामिनिन्द्राय नमः, ऊँ महापादाय नमः, ऊँ महाहस्ताय नमः, ऊँ महाकायाय नमः, ऊँ महायशसे नमः, ऊँ महामूर्धने नमः, ऊँ महामात्राय नमः, ऊँ महानेत्राय नमः, ऊँ निशालयाय नमः, ऊँ महान्तकाय नमः, ऊँ महाकर्णाय नमः, ऊँ महोष्ठाय नमः, ऊँ महाहनवे नमः, ऊँ महानासाय नमः,ऊँ महाकम्बवे नमः, ऊँ महाग्रीवाय नमः, ऊँ श्मशानभाजे नमः,ऊँ महावक्षसे नमः, ऊँ महोरस्काय नमः, ऊँ अंतरात्मने नमः, ऊँ मृगालयाय नमः, ऊँ लंबनाय नमः, ऊँ लम्बितोष्ठाय नमः, ऊँ महामायाय नमः, ऊँ पयोनिधये नमः, ऊँ महादन्ताय नमः, ऊँ महाद्रष्टाय नमः, ऊँ महाजिह्वाय नमः, ऊँ महामुखाय नमः, ऊँ महारोम्णे नमः, ऊँ महाकोशाय नमः, ऊँ महाजटाय नमः, ऊँ प्रसन्नाय नमः, ऊँ प्रसादाय नमः, ऊँ प्रत्ययाय नमः, ऊँ गिरिसाधनाय नमः, ऊँ स्नेहनाय नमः, ऊँ अस्नेहनाय नमः, ऊँ अजिताय नमः, ऊँ महामुनये नमः, ऊँ वृक्षाकाराय नमः, ऊँ वृक्षकेतवे नमः, ऊँ अनलाय नमः, ऊँ वायुवाहनाय नमः (५००)

ऊँ गण्डलिने नमः, ऊँ मेरूधाम्ने नमः, ऊँ देवाधिपतये नमः, ऊँ अथर्वशीर्षाय नमः, ऊँ सामास्या नमः, ऊँ ऋक्सहस्रामितेक्षणाय नमः, ऊँ यजुः पादभुजाय नमः, ऊँ गुह्याय नमः, ऊँ प्रकाशाय नमः, ऊँ जंगमाय नमः, ऊँ अमोघार्थाय नमः, ऊँ प्रसादाय नमः, ऊँ अभिगम्याय नमः, ऊँ सुदर्शनाय नमः, ऊँ उपकाराय नमः, ऊँ प्रियाय नमः, ऊँ सर्वाय नमः, ऊँ कनकाय नमः, ऊँ काञ्चनवच्छये नमः, ऊँ नाभये नमः, ऊँ नन्दिकराय नमः, ऊँ भावाय नमः, ऊँ पुष्करथपतये नमः, ऊँ स्थिराय नमः, ऊँ द्वादशाय नमः, ऊँ त्रासनाय नमः, ऊँ आद्याय नमः, ऊँ यज्ञाय नमः, ऊँ यज्ञसमाहिताय नमः, ऊँ नक्तंस्वरूपाय नमः, ऊँ कलये नमः, ऊँ कालाय नमः, ऊँ मकराय नमः, ऊँ कालपूजिताय नमः, ऊँ सगणाय नमः, ऊँ गणकराय नमः, ऊँ भूतवाहनसारथये नमः, ऊँ भस्मशयाय नमः, ऊँ भस्मगोप्त्रे नमः, ऊँ भस्मभूताय नमः, ऊँ तरवे नमः, ऊँ गणाय नमः, ऊँ लोकपालाय नमः, ऊँ आलोकाय नमः, ऊँ महात्मने नमः, ऊँ सर्वपूजिताय नमः, ऊँ शुक्लाय नमः, ऊँ त्रिशुक्लाय नमः, ऊँ संपन्नाय नमः, ऊँ शुचये नमः (५५०)

ऊँ भूतनिशेविताय नमः, ऊँ आश्रमस्थाय नमः, ऊँ क्रियावस्थाय नमः, ऊँ विश्वकर्ममतये नमः, ऊँ वराय नमः, ऊँ विशालशाखाय नमः, ऊँ ताम्रोष्ठाय नमः, ऊँ अम्बुजालाय नमः, ऊँ सुनिश्चलाय नमः, ऊँ कपिलाय नमः, ऊँ कपिशाय नमः, ऊँ शुक्लाय नमः, ऊँ आयुषे नमः, ऊँ पराय नमः, ऊँ अपराय नमः, ऊँ गंधर्वाय नमः, ऊँ अदितये नमः, ऊँ ताक्ष्याय नमः, ऊँ सुविज्ञेयाय नमः, ऊँ सुशारदाय नमः, ऊँ परश्वधायुधाय नमः, ऊँ देवाय नमः, ऊँ अनुकारिणे नमः, ऊँ सुबान्धवाय नमः, ऊँ तुम्बवीणाय नमः, ऊँ महाक्रोधाय नमः, ऊँ ऊर्ध्वरेतसे नमः, ऊँ जलेशयाय नमः, ऊँ उग्राय नमः, ऊँ वंशकराय नमः, ऊँ वंशाय नमः, ऊँ वंशानादाय नमः, ऊँ अनिन्दिताय नमः, ऊँ सर्वांगरूपाय नमः, ऊँ मायाविने नमः, ऊँ सुहृदे नमः, ऊँ अनिलाय नमः, ऊँ अनलाय नमः, ऊँ बन्धनाय नमः, ऊँ बन्धकर्त्रे नमः, ऊँ सुवन्धनविमोचनाय नमः, ऊँ सयज्ञयारये नमः, ऊँ सकामारये नमः, ऊँ महाद्रष्टाय नमः, ऊँ महायुधाय नमः, ऊँ बहुधानिन्दिताय नमः, ऊँ शर्वाय नमः, ऊँ शंकराय नमः, ऊँ शं कराय नमः, ऊँ अधनाय नमः (६००) 

ऊँ अमरेशाय नमः, ऊँ महादेवाय नमः, ऊँ विश्वदेवाय नमः, ऊँ सुरारिघ्ने नमः, ऊँ अहिर्बुद्धिन्याय नमः,  ऊँ अनिलाभाय नमः, ऊँ चेकितानाय नमः, ऊँ हविषे नमः, ऊँ अजैकपादे नमः, ऊँ कापालिने नमः, ऊँ त्रिशंकवे नमः, ऊँ अजिताय नमः, ऊँ शिवाय नमः, ऊँ धन्वन्तरये नमः, ऊँ धूमकेतवे नमः, ऊँ स्कन्दाय नमः, ऊँ वैश्रवणाय नमः, ऊँ धात्रे नमः, ऊँ शक्राय नमः, ऊँ विष्णवे नमः, ऊँ मित्राय नमः, ऊँ त्वष्ट्रे नमः, ऊँ ध्रुवाय नमः, ऊँ धराय नमः, ऊँ प्रभावाय नमः, ऊँ सर्वगोवायवे नमः, ऊँ अर्यम्णे नमः, ऊँ सवित्रे नमः, ऊँ रवये नमः, ऊँ उषंगवे नमः, ऊँ विधात्रे नमः, ऊँ मानधात्रे नमः, ऊँ भूतवाहनाय नमः, ऊँ विभवे नमः, ऊँ वर्णविभाविने नमः, ऊँ सर्वकामगुणवाहनाय नमः, ऊँ पद्मनाभाय नमः, ऊँ महागर्भाय नमः, चन्द्रवक्त्राय नमः, ऊँ अनिलाय नमः, ऊँ अनलाय नमः, ऊँ बलवते नमः, ऊँ उपशान्ताय नमः, ऊँ पुराणाय नमः, ऊँ पुण्यचञ्चवे नमः, ऊँ ईरूपाय नमः, ऊँ कुरूकर्त्रे नमः, ऊँ कुरूवासिने नमः, ऊँ कुरूभूताय नमः, ऊँ गुणौषधाय नमः (६५०) 

ऊँ सर्वाशयाय नमः, ऊँ दर्भचारिणे नमः, ऊँ सर्वप्राणिपतये नमः, ऊँ देवदेवाय नमः, ऊँ सुखासक्ताय नमः, ऊँ सत स्वरूपाय नमः, ऊँ असत् रूपाय नमः, ऊँ सर्वरत्नविदे नमः, ऊँ कैलाशगिरिवासने नमः, ऊँ हिमवद्गिरिसंश्रयाय नमः, ऊँ कूलहारिणे नमः, ऊँ कुलकर्त्रे नमः, ऊँ बहुविद्याय नमः, ऊँ बहुप्रदाय नमः, ऊँ वणिजाय नमः, ऊँ वर्धकिने नमः, ऊँ वृक्षाय नमः, ऊँ बकुलाय नमः, ऊँ चंदनाय नमः, ऊँ छदाय नमः, ऊँ सारग्रीवाय नमः, ऊँ महाजत्रवे नमः, ऊँ अलोलाय नमः, ऊँ महौषधाय नमः, ऊँ सिद्धार्थकारिणे नमः, ऊँ छन्दोव्याकरणोत्तर-सिद्धार्थाय नमः, ऊँ सिंहनादाय नमः, ऊँ सिंहद्रंष्टाय नमः, ऊँ सिंहगाय नमः, ऊँ सिंहवाहनाय नमः, ऊँ प्रभावात्मने नमः, ऊँ जगतकालस्थालाय नमः, ऊँ लोकहिताय नमः, ऊँ तरवे नमः, ऊँ सारंगाय नमः, ऊँ नवचक्रांगाय नमः, ऊँ केतुमालिने नमः, ऊँ सभावनाय नमः, ऊँ भूतालयाय नमः, ऊँ भूतपतये नमः, ऊँ अहोरात्राय नमः, ऊँ अनिन्दिताय नमः, ऊँ सर्वभूतवाहित्रे नमः, ऊँ सर्वभूतनिलयाय नमः, ऊँ विभवे नमः, ऊँ भवाय नमः, ऊँ अमोघाय नमः, ऊँ संयताय नमः, ऊँ अश्वाय नमः, ऊँ भोजनाय नमः, (७००)

ऊँ प्राणधारणाय नमः, ऊँ धृतिमते नमः, ऊँ मतिमते नमः, ऊँ दक्षाय नमःऊँ सत्कृयाय नमः, ऊँ युगाधिपाय नमः, ऊँ गोपाल्यै नमः, ऊँ गोपतये नमः, ऊँ ग्रामाय नमः, ऊँ गोचर्मवसनाय नमः, ऊँ हरये नमः, ऊँ हिरण्यबाहवे नमः, ऊँ प्रवेशिनांगुहापालाय नमः, ऊँ प्रकृष्टारये नमः, ऊँ महाहर्षाय नमः, ऊँ जितकामाय नमः, ऊँ जितेन्द्रियाय नमः, ऊँ गांधाराय नमः, ऊँ सुवासाय नमः, ऊँ तपःसक्ताय नमः, ऊँ रतये नमः, ऊँ नराय नमः, ऊँ महागीताय नमः, ऊँ महानृत्याय नमः, ऊँ अप्सरोगणसेविताय नमः, ऊँ महाकेतवे नमः, ऊँ महाधातवे नमः, ऊँ नैकसानुचराय नमः, ऊँ चलाय नमः, ऊँ आवेदनीयाय नमः, ऊँ आदेशाय नमः, ऊँ सर्वगंधसुखावहाय नमः, ऊँ तोरणाय नमः, ऊँ तारणाय नमः, ऊँ वाताय नमः, ऊँ परिधये नमः, ऊँ पतिखेचराय नमः, ऊँ संयोगवर्धनाय नमः, ऊँ वृद्धाय नमः, ऊँ गुणाधिकाय नमः, ऊँ अतिवृद्धाय नमः, ऊँ नित्यात्मसहायाय नमः, ऊँ देवासुरपतये नमः, ऊँ पत्ये नमः, ऊँ युक्ताय नमः, ऊँ युक्तबाहवे नमः, ऊँ दिविसुपर्वदेवाय नमः, ऊँ आषाढाय नमः, ऊँ सुषाढ़ाय नमः, ऊँ ध्रुवाय नमः (७५०)

ऊँ हरिणाय नमः, ऊँ हराय नमः, ऊँ आवर्तमानवपुषे नमः, ऊँ वसुश्रेष्ठाय नमः, ऊँ महापथाय नमः, ऊँ विमर्षशिरोहारिणे नमः, ऊँ सर्वलक्षणलक्षिताय नमः, ऊँ अक्षरथयोगिने नमः, ऊँ सर्वयोगिने नमः, ऊँ महाबलाय नमः, ऊँ समाम्नायाय नमः, ऊँ असाम्नायाय नमः, ऊँ तीर्थदेवाय नमः, ऊँ महारथाय नमः, ऊँ निर्जीवाय नमः, ऊँ जीवनाय नमः, ऊँ मंत्राय नमः, ऊँ शुभाक्षाय नमः, ऊँ बहुकर्कशाय नमः, ऊँ रत्नप्रभूताय नमः, ऊँ रत्नांगाय नमः, ऊँ महार्णवनिपानविदे नमः, ऊँ मूलाय नमः, ऊँ विशालाय नमः, ऊँ अमृताय नमः, ऊँ व्यक्ताव्यवक्ताय नमः, ऊँ तपोनिधये नमः, ऊँ आरोहणाय नमः, ऊँ अधिरोहाय नमः, ऊँ शीलधारिणे नमः, ऊँ महायशसे नमः, ऊँ सेनाकल्पाय नमः, ऊँ महाकल्पाय नमः, ऊँ योगाय नमः, ऊँ युगकराय नमः, ऊँ हरये नमः, ऊँ युगरूपाय नमः, ऊँ महारूपाय नमः, ऊँ महानागहतकाय नमः, ऊँ अवधाय नमः, ऊँ न्यायनिर्वपणाय नमः, ऊँ पादाय नमः, ऊँ पण्डिताय नमः, ऊँ अचलोपमाय नमः, ऊँ बहुमालाय नमः, ऊँ महामालाय नमः, ऊँ शशिहरसुलोचनाय नमः, ऊँ विस्तारलवणकूपाय नमः, ऊँ त्रिगुणाय नमः, ऊँ सफलोदयाय नमः (८००)

ऊँ त्रिलोचनाय नमः, ऊँ विषण्डागाय नमः, ऊँ मणिविद्धाय नमः, ऊँ जटाधराय नमः, ऊँ बिन्दवे नमः, ऊँ विसर्गाय नमः, ऊँ सुमुखाय नमः, ऊँ शराय नमः, ऊँ सर्वायुधाय नमः, ऊँ सहाय नमः, ऊँ सहाय नमः, ऊँ निवेदनाय नमः, ऊँ सुखाजाताय नमः, ऊँ सुगन्धराय नमः, ऊँ महाधनुषे नमः, ऊँ गंधपालिभगवते नमः,  ऊँ सर्वकर्मोत्थानाय नमः, ऊँ मन्थानबहुलवायवे नमः, ऊँ सकलाय नमः, ऊँ सर्वलोचनाय नमः, ऊँ तलस्तालाय नमः, ऊँ करस्थालिने नमः, ऊँ ऊर्ध्वसंहननाय नमः, ऊँ महते नमः, ऊँ छात्राय नमः, ऊँ सुच्छत्राय नमः, ऊँ विख्यातलोकाय नमः, ऊँ सर्वाश्रयक्रमाय नमः, ऊँ मुण्डाय नमः, ऊँ विरूपाय नमः, ऊँ विकृताय नमः, ऊँ दण्डिने नमः, ऊँ कुदण्डिने नमः, ऊँ विकुर्वणाय नमः, ऊँ हर्यक्षाय नमः, ऊँ ककुभाय नमः, ऊँ वज्रिणे नमः, ऊँ शतजिह्वाय नमः, ऊँ सहस्रपदे नमः, ऊँ देवेन्द्राय नमः, ऊँ सर्वदेवमयाय नमः, ऊँ गुरवे नमः, ऊँ सहस्रबाहवे नमः, ऊँ सर्वांगाय नमः, ऊँ शरण्याय नमः, ऊँ सर्वलोककृते नमः, ऊँ पवित्राय नमः, ऊँ त्रिककुन्मंत्राय नमः, ऊँ कनिष्ठाय नमः, ऊँ कृष्णपिंगलाय नमः (८५०)

ऊँ ब्रह्मदण्डविनिर्मात्रे नमः, ऊँ शतघ्नीपाशशक्तिमते नमः, ऊँ पद्मगर्भाय नमः, ऊँ महागर्भाय नमः, ऊँ ब्रह्मगर्भाय नमः, ऊँ जलोद्भावाय नमः, ऊँ गभस्तये नमः, ऊँ ब्रह्मकृते नमः, ऊँ ब्रह्मिणे नमः, ऊँ ब्रह्मविदे नमः, ऊँ ब्राह्मणाय नमः, ऊँ गतये नमः, ऊँ अनंतरूपाय नमः, ऊँ नैकात्मने नमः, ऊँ स्वयंभुवतिग्मतेजसे नमः, ऊँ उर्ध्वगात्मने नमः, ऊँ पशुपतये नमः, ऊँ वातरंहसे नमः, ऊँ मनोजवाय नमः, ऊँ चंदनिने नमः, ऊँ पद्मनालाग्राय नमः, ऊँ सुरभ्युत्तारणाय नमः, ऊँ नराय नमः, ऊँ कर्णिकारमहास्रग्विणमे नमः, ऊँ नीलमौलये नमः, ऊँ पिनाकधृषे नमः, ऊँ उमापतये नमः, ऊँ उमाकान्ताय नमः, ऊँ जाह्नवीधृषे नमः, ऊँ उमादवाय नमः, ऊँ वरवराहाय नमः, ऊँ वरदाय नमः, ऊँ वरेण्याय नमः, ऊँ सुमहास्वनाय नमः, ऊँ महाप्रसादाय नमः, ऊँ दमनाय नमः, ऊँ शत्रुघ्ने नमः, ऊँ श्वेतपिंगलाय नमः, ऊँ पीतात्मने नमः, ऊँ परमात्मने नमः, ऊँ प्रयतात्मने नमः, ऊँ प्रधानधृषे नमः, ऊँ सर्वपार्श्वमुखाय नमः, ऊँ त्रक्षाय नमः, ऊँ धर्मसाधारणवराय नमः, ऊँ चराचरात्मने नमः, ऊँ सूक्ष्मात्मने नमः, ऊँ अमृतगोवृषेश्वराय नमः, ऊँ साध्यर्षये नमः, ऊँ आदित्यवसवे नमः (९००)

ऊँ विवस्वत्सवित्रमृताय नमः, ऊँ व्यासाय नमः, ऊँ सर्गसुसंक्षेपविस्तराय नमः, ऊँ पर्ययोनराय नमः, ऊँ ऋतवे नमः, ऊँ संवत्सराय नमः, ऊँ मासाय नमः, ऊँ पक्षाय नमः, ऊँ संख्यासमापनाय नमः, ऊँ कलायै नमः, ऊँ काष्ठायै नमः, ऊँ लवेभ्यो नमः, ऊँ मात्रेभ्यो नमः, ऊँ मुहूर्ताहःक्षपाभ्यो नमः, ऊँ क्षणेभ्यो नमः, ऊँ विश्वक्षेत्राय नमः, ऊँ प्रजाबीजाय नमः, ऊँ लिंगाय नमः, ऊँ आद्यनिर्गमाय नमः, ऊँ सत् स्वरूपाय नमः, ऊँ असत् रूपाय नमः, ऊँ व्यक्ताय नमः, ऊँ अव्यक्ताय नमः, ऊँ पित्रे नमः, ऊँ मात्रे नमः, ऊँ पितामहाय नमः, ऊँ स्वर्गद्वाराय नमः, ऊँ प्रजाद्वाराय नमः, ऊँ मोक्षद्वाराय नमः, ऊँ त्रिविष्टपाय नमः, ऊँ निर्वाणाय नमः, ऊँ ह्लादनाय नमः, ऊँ ब्रह्मलोकाय नमः, ऊँ परागतये नमः, ऊँ देवासुरविनिर्मात्रे नमः, ऊँ देवासुरपरायणाय नमः, ऊँ देवासुरगुरूवे नमः, ऊँ देवाय नमः, ऊँ देवासुरनमस्कृताय नमः, ऊँ देवासुरमहामात्राय नमः, ऊँ देवासुरमहामात्राय नमः, ऊँ देवासुरगणाश्रयाय नमः, ऊँ देवासुरगणाध्यक्षाय नमः, ऊँ देवासुरगणाग्रण्ये नमः, ऊँ देवातिदेवाय नमः, ऊँ देवर्षये नमः, ऊँ देवासुरवरप्रदाय नमः, ऊँ विश्वाय नमः, ऊँ देवासुरमहेश्वराय नमः, ऊँ सर्वदेवमयाय नमः(९५०)

ऊँ अचिंत्याय नमः, ऊँ देवात्मने नमः, ऊँ आत्मसंबवाय नमः, ऊँ उद्भिदे नमः, ऊँ त्रिविक्रमाय नमः, ऊँ वैद्याय नमः, ऊँ विरजाय नमः, ऊँ नीरजाय नमः, ऊँ अमराय नमः, ऊँ इड्याय नमः, ऊँ हस्तीश्वराय नमः, ऊँ व्याघ्राय नमः, ऊँ देवसिंहाय नमः, ऊँ नरर्षभाय नमः, ऊँ विभुदाय नमः, ऊँ अग्रवराय नमः, ऊँ सूक्ष्माय नमः, ऊँ सर्वदेवाय नमः, ऊँ तपोमयाय नमः, ऊँ सुयुक्ताय नमः, ऊँ शोभनाय नमः, ऊँ वज्रिणे नमः, ऊँ प्रासानाम्प्रभवाय नमः, ऊँ अव्ययाय नमः, ऊँ गुहाय नमः, ऊँ कान्ताय नमः, ऊँ निजसर्गाय नमः, ऊँ पवित्राय नमः, ऊँ सर्वपावनाय नमः, ऊँ श्रृंगिणे नमः, ऊँ श्रृंगप्रियाय नमः, ऊँ बभ्रवे नमः, ऊँ राजराजाय नमः, ऊँ निरामयाय नमः, ऊँ अभिरामाय नमः, ऊँ सुरगणाय नमः, ऊँ विरामाय नमः, ऊँ सर्वसाधनाय नमः, ऊँ ललाटाक्षाय नमः, ऊँ विश्वदेवाय नमः, ऊँ हरिणाय नमः, ऊँ ब्रह्मवर्चसे नमः, ऊँ स्थावरपतये नमः, ऊँ नियमेन्द्रियवर्धनाय नमः, ऊँ सिद्धार्थाय नमः, ऊँ सिद्धभूतार्थाय नमः, ऊँ अचिन्ताय नमः, ऊँ सत्यव्रताय नमः, ऊँ शुचये नमः, ऊँ व्रताधिपाय नमः, ऊँ पराय नमः, ऊँ ब्रह्मणे नमः, ऊँ भक्तानांपरमागतये नमः, ऊँ विमुक्ताय नमः, ऊँ मुक्ततेजसे नमः, ऊँ श्रीमते नमः, ऊँ श्रीवर्धनाय नमः, ऊँ श्री जगते नमः (१००८)

ऊँ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात पूर्णमुदच्यते।
पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ।।
ऊँ शांतिः शांतिः शांतिः
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Friday, February 16, 2018

जन्म नक्षत्र फल

*नक्षत्र जन्म फल* :-
*अश्विनी नक्षत्र* क्षत्र:धनी, हंसमुख, सुंदर, बुद्दिमान, अच्छी पोशाक, आभूषण पहनने का शौक़ीन, गठीला शरीर, जनप्रिय | हर काम में होशियार | परोपकारी, यशस्वी, वाहन एवं नौकर युक्त| भाग्योदय २० वर्ष बाद , यशस्वी, एश्वर्य संपन्न, नम्र स्पष्ट वक्ता अस्थिर चरित्रवान | स्वार्थपूर्ति के लिए विश्वासघात भी कर ले | क्रूर गृह की दशा में सूर्य, मंगल व् गुरु के अंतर में शत्रु कष्ट, चोरी का भय |

*भरणी नक्षत्र* :सत्यवादी, स्वाथ्य अच्छा, बीमार कम रहे | सुमार्ग पर चले, सुखी स्त्रियों में आशक्त, अस्थिर मनोवृत्ति, अस्थिर विचार, विदेश गमन की इच्छा, दीर्घायु, शत्रु विजयी, भाग्योदय २५ वर्ष बाद | कभी चोट लगकर अंग भंग होना संभव | कम बोलने वाला, क्रूर व् कृतघ्न, नीच कर्म रत, क्रूर गृह की महादशा तथा चन्द्र – राहू – शनि की अंतर दशा में शत्रु – कष्ट, चोरी भय |

*कृतिका नक्षत्र* :कामी चरित्र हीन, कंजूस, कृतघ्न, मित्र एवं सम्बन्धियों से बिगाड़ हो | जिस  काम में  हाथ डाले उसे पूरा करके छोड़े | अच्छे भोजन आदि का शौक़ीन | स्त्रियों से मित्रता बढाने में सिद्धहस्त | किसी विशेष विषय में दक्ष | स्वेच्छानुसार कार्य करने वाला | बुद्दिमान लोभी, प्रसिद्ध,तेजस्वी, आशावादी, बाह्य व्यक्तित्व शानदार,  विद्वान देखने में भव्य | मुकदमेबाजी में रूचि रखने वाला चालाक | भाग्योदय २९ वर्ष बाद , क्रूर गृह की दशा तथा मंगल, गुरु, बुध, की अन्तर्दशा में शत्रुकष्ट चोरी का भय |

*रोहिणी नक्षत्र* :सुंदर आकर्षक लुभावना व्यक्तित्व, सत्य एवं मधुर भाषी जनप्रिय कार्य पटु कलाकार सांसारिक कार्य बुद्धि से संपन्न करे दृढ प्रतिज्ञ | रात का जन्म होतो झूठ बोलने वाला | कठोर मन वासना अधिक वासना पूर्ती के लिए कुछ भी कर सकता है | भोगी धन व् स्मरण शक्ति तीव्र , नेत्र बड़े ललाट चौड़ा आलसी भाग्योदय ३० वर्ष के पश्चात | क्रूर गृह की दशा में राहू शनि व् केतु के अंतर में शत्रु कष्ट चोरी का भय |

*मृगशिरा नक्षत्र*  :शोख तबियत स्त्रियों से संपर्क रखे | कामी तीव्र गति से चले घमंडी छोटी छोटी बात पर बिगड़े  क्रोधी चालाक काम निकालने में निपुण | लड़ाई फसाद के कामों में रूचि रखे, प्रियजन के अनादर में खुश रहे, डरपोक विद्वान् विवेकशील यात्रा में रूचि, धन संतान व् मित्रों से युक्त, विद्वान होते हुए भी  चंचल वृत्ति, अभिमान की मात्रा विशेष रहे | भाग्योदय २८ वर्ष पश्चात क्रूर गृह की दशा गुरु – बुध, शुक्र के अंतर में शत्रु – कष्ट चोरी का भय |

*आद्रा नक्षत्र* :नम्र स्वभाव मजबूत दिल बुद्दिमान कोई कष्ट आये तो घबराये नहीं | जो कमाए खर्च हो जाए | अन्नादि का भी संग्रह न हो पाए | धन दौलत के सुख से वंचित रहे | अच्छे कामों में रूचि रखे | विचलित मन मस्तिष्क वाला, बलवान क्षुद्र व् ओछे विचार युक्त कम शिक्षित आडम्बरी धार्मिक कामों में व्यर्थ प्रदर्शन करने वाला | ये प्राय: फिटर ओवेरसिएर, फोरमैन, इंजनीयर इत्यादि होते हैं | भाग्योदय २५ वर्ष बाद में होता है | क्रूर गृह की दशा में शनि – केतु – सूर्य के अंतर में शत्रु – कष्ट चोरी का भय |

*पुनर्वसु नक्षत्र* :बुद्दिमानविद्वान् शीतल स्वभाव बहु मित्रों वाला संतान सुख युक्त, श्वेत वस्तुओं में रूचि, सफर बहुत करे | काव्य प्रेमी माता  पिता का भक्त | आनंदमय जीवन | अपने कार्यों में प्रसिद्धी प्राप्त करे | परोपकारी होते हुए भी स्वस्वार्थ में कमी नहीं आने देता, प्यास खूब लगती है | अहंकारी दुष्ट, दुर्बुद्दी – दुष्कर्मी , मुर्ख परिजन को दुःख व् कष्ट देने वाला गरीब | भाग्योदय २४ वर्ष के पश्चात, क्रूर गृह की दशा में बुध – शुक्र – चन्द्र के अंतर में शत्रु कष्ट चोरी का भय |

*पुष्य नक्षत्र* :बुद्दिमान, सुशील होशियार धर्म में आस्था रखे | कामी दुसरे का काम संवारने का प्रयत्न करे, जो मिले सो खा लेवे | दुसरे की बात शीघ्र समझने वाला | चतुर कार्य दक्ष सुन्दर मेधावी सत्यवादी कुटुंब प्रेमी विशाल ह्रदय माना प्रेमी ईश्वर भक्त राज्य पक्ष से सम्मानित वाक् पटु कार्य कुशल देव – गुरु – अतिथि प्रेमी | द्रढ़ देहि करुण मन | कवि लेखक पत्रकार वकील अध्यन – अध्यापन में रूचि लेने वाला | प्रशासनिक कार्यों में दक्ष वस्त्राभूषण नौकर वाहन युक्त होता है | भाग्योदय ३५ वर्ष पश्चात | समाज में प्रतिष्ठा प्राप्त, क्रूर गृह की दशा में केतु, सूर्य व् मंगल के अंतर में शत्रु  कष्ट चोरी का भय |

*आश्लेषा नक्षत्र*: नेक कामों की नक़ल करे कुटुंब बड़ा हो साधू संतों की सेवा करे | अपनी अकड में रहे किसी को भी खातिर में नहीं लाये | सदैव अपना फायदा सोचे नेकी बुराई की परवाह नहीं करे, रिश्तेदारों से अनबन रहे शराब आदि में ज्यादा रूचि रखे, झूठा, कृतघ्न धूर्त लम्पट अत्यंत क्रोधी दुराचारी निर्लज्ज शत्रु विजयी औषधी व्यापार में लाभ, परस्त्रीगामी वासना की पूर्ती के लिए निम्नतम काम करने के लिए तैयार हो जाता है  | अविश्वास की  चरम सीमा को पार करने वाला होता है |भाग्योदय  ३० वर्ष पश्चात  होता है क्रूर गृह की महादशा में शुक्र चन्द्र राहु के अंतर में शत्रु कष्ट चोरी का भय होता है |                                                                                                           
*मघा नक्षत्र* :धनवान पत्नी से प्यार करने वाला खुशहाल माता पिता की सेवा करने वाला चतुर व्यवहार कुशल व्यापार में लाभ कमाने वाला, योजनाकार काम पिपासु अस्थिर चित्तवृत्ति किन्तु अत्यंत साहसी | स्वास्थ्य निर्बल रहना घमंडी किन्तु परिश्रमी अपने अहं पूर्ति के लिए कुछ भी करने वाला | धनाड्य किन्तु स्त्रियों में आशक्त रहने वाला व्यर्थ वाद विवाद में समय व्यतीत होना | किसी भी  बात की जड़ तक पहुँचने की क्षमता रखना | भाग्योदय २५ वर्ष के बाद होना | क्रूर गृह की दशा में सूर्य मंगल व् गुरु के अंतर दशा में शत्रु कष्ट एवं चोरी का भय |

*पूर्वा – फाल्गुनी* :इस नक्षत्र में जन्म लेने वाला शत्रु विजयी, होशियार हर काम में निपुण मृदु भाषी दिलखुश बड़े लोगों से सम्बन्ध रखने वाला | स्त्रियों के लीये आकर्षक विधावान किसी सरकारी काम से सम्बन्ध रखने वाला एवं राजकीय सम्मान पाने  वाला | शफर का शौक़ीन व् दानी होता है |वस्त्राभूषण वाहन धनवान व् संतान युक्त व् नृत्य – संगीत प्रेमी होता है | हंसी  मजाक व् चापलूसी करने में  माहीर होता है | अधिक मित्रवान होता है तथा  सुंदर सुगठित शरीर वाला उग्र स्वभाव वाला नेतृत्व प्रधान जीवन  जीने वाला | भाग्योदय २८ – ३२ वर्ष के बीच में होगा, क्रूर गृह की महादशा में चन्द्र राहु शनि के  अंतर दशा में शत्रु कष्ट व् चोरी का भय हो सकता है |

*उत्तर – फाल्गुनी* : धनी व् धन इकठ्ठा करने वाला विलासी व् पहलवानी का शौक करने वाला तथा कुशाग्र बुद्धि वाला एवं मृदुभाषी सत्य बोलने वाला, दूसरों का काम दिल से करने वाला अधिक संतान वाला अपनी मेहनत के बल पर धनी बनने वाला | पत्नी से मनमुटाव व् घर में कलेश रहना गृहस्थ जीवन में भाग्योदय ३० – ३२ वर्ष की उम्र में होना | क्रूर गृह  की महादशा में मंगल गुरु व् बुध के अंतर में शत्रु कष्ट चोरी का  भय  हो सकता है |

*हस्त नक्षत्र* :अपनी जाति बिरादरी में मुखिया बन सकता है | विरोधियों से लड़ना झगड़ना, झूठ  व् धोखेबाजी की आदत होना भाई बंधुओं से दूर रहना चरित्र हीन क्रोधी शराबी होना पत्नी रोगी होना व् संतान का गलत आदतों में पड़ना | अशांत मन रहना भाग्यशाली सम्मानित व् सुखी होना निर्दयी होना | आजीवन कलह वाला वातावरण बनाये रखना स्वभाव से क्रूर होना | बुरे कार्य करना डकैती डालना व् हिंसा करना आदि | भाग्योदय ३०- ३२ वर्ष में होना | क्रूर गृह की महादशा में राहु – शनि - केतु के अन्तर्दशा में शत्रु कष्ट व् चोरी का भय बना रहना |

*चित्रा नक्षत्र* : चित्रा नक्षत्र में जन्म लेने वाला बुद्धिमान साहसी धनवान दानी सुशील शरीर सुन्दर स्त्री व् संतान का सुख पाने वाला होता है | धर्म में आस्था रखने वाला व् आयुर्वेद को जानने वाला, भवन निर्माण में रूचि रखने वाला होता है | सौंदर्य प्रसाधन प्रेमी चित्रकला व् अभिनय का जानकार बहुमूल्य वस्तुओं का व्यापार करने वाला तथा प्रभावशाली व्यक्तित्व वाला, गायन गणित व् औषधियों तथा लेखनकला से धनोपार्जन करने वाला होगा | भाग्योदय ३३ से ३८ वर्ष में होगा | क्रूर गृह की महादशा में गुरु, बुध, शुक्र, के अंतर में शत्रु कष्ट व् चोरी का भय रहेगा|

*स्वाति नक्षत्र* : समझदार शीतल स्वभाव मित्रवत  होशियार व् व्यापार में  निपुण  होगा | कुशल व्यवसायी व् व्यापार तथा बौद्धिक कार्यों  द्वारा मनचाहा लाभ अर्जित करना व् यस प्राप्त करना | शिक्षा अधूरी छोड़नी पद सकती है, आर्थिक द्रष्टि से संपन्न व् ऐश्वर्यशाली होगा | अपने समाज में पूर्ण  सम्मान प्राप्त करेगा | इंजीनियर व् टेक्नीकल  कार्य करेगा परोपकारी व् साधू संतों की सेवा करने वाला बनेगा |भाग्योदय ३० से ३६ वर्ष में होगा | क्रूर गृह के महादशा में  शनि, केतु, सूर्य के अंतर में शत्रु कष्ट व् चोरी का भय रहेगा |

*विशाखा नक्षत्र* :इस नक्षत्र में जन्म लेने वाला सुंदर धनवान मगर खोटे कामों में रूचि रखने वाला व् लड़ाई झगडा करने वाला, कृपन लोभी वाक्पटु सामान्य बुद्धि वाला क्रोधी अहंकारी दम्भी कामासक्त शराबी जुआरी स्त्री के वशीभूत होने वाला पाप पुण्य से दूर रहने वाला मतलबी अचानक धन प्राप्त करने वाला शत्रु विजयी |भाग्योदय २१-२८-३४ वर्ष में होगा | कलह पूर्ण जीवन यापन करना | क्रूर गृह के महादशा में बुध, शुक्र, चन्द्र, के अंतर में शत्रु कष्ट व् चोरी का भय रहेगा|

*अनुराधा नक्षत्र* : शक्तिशाली व् स्थूल शरीर वाला धनवान मान,सम्मान, पाने वाला, विधा कला व् काम धंधे में निपुण ज्यादा शफर करने वाला होगा | अस्थिर मनोवृत्ति साहसी पराक्रमी मिलनसार  यशस्वी स्वालंबी रौबीला  सुन्दर व्यतित्व का धनी बहुत खाने वाला धार्मिक अध्ययनशील एकांत प्रिय दानी सहिष्णु होगा | सरकारी नौकरी पाने वाल स्वार्थ पूर्ती हेतु छल प्रपंच करने वाला मृदुभाषी स्त्रियों के दिलों में राज करने वाला होगा |  भाग्योदय ३९ वर्ष पश्चात होगा | क्रूर गृह की महादशा में केतु सूर्य मंगल के अंतर में शत्रु कष्ट व् चोरी का भय  रहेगा

*ज्येष्ठा नक्षत्र*:चतुर सभी कार्यों में होशियार बहुमित्र संतोषी शीतल स्वभाव कला की शौक़ीन क्रोधी धर्म के अनुरूप चलने वाली पराई स्त्री पर आशक्त होने वाला | सम्पूर्ण विधा का ज्ञान प्राप्त करना सुन्दर व्यतित्व वाला अपने कार्य में दक्ष अच्छी संतान प्राप्त करने वाला, गृहस्थ जीवन का अधूरा सुख प्राप्त करने वाला कवि लेखक पत्रकार साहित्यकार प्रशाशक निरीक्षक वकील चार्टर्ड एकाउंटेंट आदि हो सकते हैं | उम्र के २७,३१,४९ वर्ष स्वास्थ्य की द्रष्टि ठीक नहीं रहेंगे| क्रूर गृह की महादशा में शुक्र,चन्द्र,राहु, की अन्तर्दशा में शत्रु कष्ट व् चोरी का भय रहेगा |

*मूल नक्षत्र* :विशाल ह्रदय दानी गंभीर धनी अपने समाज में सम्मान पाने वाला कमजोर स्वास्थ्य प्रायः बीमार रहने वाला वाकपटु चतुर  कृतघ्न दुष्ट धूर्त विश्वासघाती स्वार्थी वाचाल लोकप्रिय हिंसक क्रोध करने वाला होता है व् उसके जीवन में बार - बार दुर्घटनाएँ होती हैं | भाग्योदय २७ या ३१ वें वर्ष  में  होता  है | क्रूर गृह की  महादशा में सूर्य मंगल गुरु की अंतर दशाओं में शत्रु कष्ट व् चोरी का  भय रहेगा |

*पूर्वा-आषाढ़ नक्षत्र* :बुद्धिमान उपकारी सबका मित्र सभी कामों में होशियार संतान के प्रति सुखी, उदार स्वाभिमानी, शत्रुहंता, श्रेष्ठ मित्रों वाला अधिक धन नहीं होने पर भी कोई काम नहीं रुकना, भाग्यशाली, कार्य कुशल, यशस्वी, पत्नी का भी पूर्ण सुख रहता है | भाग्योदय २८ वें वर्ष में होता है | क्रूर गृह की महादशा में चन्द्र, राहू, शनि, की अन्तर्दशा में शत्रु कष्ट व् चोरी का भय होता है |

*उत्तरा-आषाढ़ नक्षत्र* : परोपकारी,मान सम्मान पाने वाला,होशियार, चतुर, बहादुर,संगीत प्रेमी, विनम्र शांत स्वभाव वाला, धार्मिक सुखी, सर्व प्रिय, विद्वान, बुद्धिमान, मेहनती धनी, सट्टेबाजी आदि का शौक पालना, तश्करी एवं अन्य कुसंगति में पड़ना, कामुक व् वेश्यागामी होना, जीवन में अनायास ही धन की प्राप्ति होना | भाग्योदय ३१ वें वर्ष में होगा, क्रूर गृह की महादशा में मंगल,गुरु, बुध, के अंतरदशा में शत्रु-कष्ट व् चोरी का भय रहता है |

*श्रवण नक्षत्र* : धनी बहुत बोलने वाला, गंभीर बुद्धिमान साहसी प्रसिद्द नेकनाम व् पत्नी सुन्दर हो | राग विधा गणित ज्योतिष में लगाव रखे, असंकुचित विचार दुसरे के दिल से भेद पाए | १९ – २४ वा वर्ष खराब रह सकता है | विवेकी विद्वान उच्च विचार धार्मिक शोभायमान व्यक्तित्व, उच्च पदाधिकारी बन सकता है काव्य संगीत में रूचि रखने वाला सिनेमा प्रेमी होगा | क्रूर गृह की महादशा में राहु – शनि – केतु के अन्तर्दशा में शत्रु कष्ट व् चोरी का भय हो सकता है |

*धनिष्ठा नक्षत्र* : राग विधा में अधिक रूचि रखने वाला होगा | भाई बंधुओं से बहुत प्यार रखे | धनी नेकनाम साहसी अच्छे काम करने वाला व् स्त्री का प्यारा होगा | सरकारी कार्य से सम्बन्ध रहेगा व् जवाहरात पहनने का शौक़ीन होगा तथा लोगों में इज्जत व् मान सम्मान प्राप्त करेगा | १५, १९, २३, वर्ष शुभ नहीं होंगे | धर्मं कर्म में लिप्त रहने वाला एश्वर्या संपन्न उदार व् समाज में सम्मान पाने वाला होगा | वासना ग्रस्त कामुक व् परस्त्रीरत हो सकता है | पत्नी व् पत्नी पक्ष से हमेशा दबा रहेगा लोभी तथा स्त्रियों से लुटने वाला होगा | क्रूर गृह की महादशा में गुरु, बुध, शुक्र, की अंतर दशा में शत्रु कष्ट व् चोरी का भय हो सकता है |

*शतभिषा नक्षत्र* : धनी सत्यवादी दानी प्रसिद्द अच्छे काम करने वाला बुद्धिमान होशियार सफल शत्रु विजेता इज्जत प्राप्त करने वाला होता है | सरकार से सम्मान प्राप्त करने वाला दूसरी स्त्री से लगाव रखने वाला तथा २८ वाँ वर्ष विशेष महत्वपूर्ण हो सकता है | सत्य भाषी परन्तु जुआरी, व्यसनी सट्टेबाज साहसी परन्तु शांत स्वभाव में कठोरता निडर ज्योतिष प्रेमी साधारण धन एवं दुसरे के माल को हड़पने की इच्छा हमेशा बनी रहती है | क्रूर गृह के महादशा में शनि केतु सूर्य की अन्तर्दशा में शत्रु कष्ट व् चोरी का भय रहेगा |

*पूर्वा-भाद्रपद नक्षत्र* : धनी सुंदर बहुत बोलने वाला, विधावान कला कुशल एवं अधिक सोने वाला कई पत्नियों वाला, संतान से सुख प्राप्त करने वाला छोटी छोटी बातों में गुस्सा होने वाला होता है| भाग्योदय १९ से २१ वर्ष में होता है | अपने कार्य में दक्ष व् चतुर तथा धूर्त व् डरपोक धनवान होते हुए भी निर्धन हो जाता है | कम सहन शक्ति वाला विचारों में कामुकता वाला, स्त्रियों से धोखे खाना वाला, पत्नी स्वभाव से चंचंल व् उग्र होती है, गृहस्थ जीवन सामान्य रहेगा | क्रूर गृह के महादशा में बुध, शुक्र, चन्द्र, के अंतर में शत्रु कष्ट व् चोरी का भय रहेगा |

*उत्तरा-भाद्रपद नक्षत्र* : सुन्दर पराक्रमी साहसी बुद्धिमान रंग गोरा वाचाल दानी शत्रु विजेता धर्मात्मा धनवान होता है | उदार परोपकारी, सुखी, धन-धान्य व् संतान युक्त जीवन | अध्ययनशील, शास्त्रों के ज्ञाता वाक्पटु जिम्मेदार, लेखक, पत्रकार, संगीतज्ञ, सफल गृहस्थ जीवन, म्रदु भाषी पत्नी वाला होता है | भाग्योदय २७ से ३१ वर्ष में संभव है | क्रूर गृह की महादशा में केतु, सूर्य, मंगल, की अन्तर्दशा में शत्रु कष्ट एवं चोरी का भय रहता है |

*रेवती नक्षत्र* : माता पिता की सेवा करने वाला, बुद्धिमान साधू स्वभाव तेज वाणी व् मित्रों से खुश रहने वाला होता है | शरीर पुष्ट निरोगी काया साहसी एवं सर्वप्रिय धनवान सुपुत्रवान कामातुर सुन्दर चतुर मेधावी, कुशाग्रबुद्धि, सलाह देने में होशियार,अच्छा व्यापारी, कवि लेखक, पत्रकार,निबंधकार, उपन्यासकार आदि होता है| स्वभाव शौम्य दृढ निश्चय वाला, प्रतिभाशाली सर्वगुण संम्पन्न सुन्दर पत्नी वाला चरित्रवान गृह कार्य में दक्ष मधुर भाषी होता है | १७ वें, २१ वें,२४ वें वर्ष ठीक नहीं होंगे | क्रूर गृह की महादशा में शुक्र- चन्द्र – राहु की अन्तर्दशा में शत्रु कष्ट व् चोरी का भय हो सकता |

*अभिजीत नक्षत्र* : अभिजीत नक्षत्र में जन्म लेने वाला सुन्दर होशियार अपराजित दृढ निश्चयी व् भाग्यवान धनवान सर्वगुण संपन्न मेहनत करने वाला शक्तिशाली व्यक्ति होता है।उपरोक्त नक्षत्र बहुत कम उपयोग में लाया जाता है, इसलिए ज्यादातर लोग इसका वर्णन कम ही करते है
माँ ज्योतिष कायँलय

Monday, February 12, 2018

रुद्राभिषेक से क्या क्या लाभ मिलता है

रुद्राभिषेक से क्या क्या लाभ मिलता है
शिव पुराण के अनुसार किस द्रव्य से अभिषेक करने से क्या फल मिलता है अर्थात आप जिस उद्देश्य की पूर्ति हेतु रुद्राभिषेक करा रहे है उसके लिए किस द्रव्य का इस्तेमाल करना चाहिए का उल्लेख शिव पुराण में किया गया है उसका सविस्तार विवरण प्रस्तुत कर रहा हू और आप से अनुरोध है की आप इसी के अनुरूप रुद्राभिषेक कराये तो आपको पूर्ण लाभ मिलेगा।

श्लोक

जलेन वृष्टिमाप्नोति व्याधिशांत्यै कुशोदकै

दध्ना च पशुकामाय श्रिया इक्षुरसेन वै।

मध्वाज्येन धनार्थी स्यान्मुमुक्षुस्तीर्थवारिणा।

पुत्रार्थी पुत्रमाप्नोति पयसा चाभिषेचनात।।

बन्ध्या वा काकबंध्या वा मृतवत्सा यांगना।

जवरप्रकोपशांत्यर्थम् जलधारा शिवप्रिया।।

घृतधारा शिवे कार्या यावन्मन्त्रसहस्त्रकम्।

तदा वंशस्यविस्तारो जायते नात्र संशयः।

प्रमेह रोग शांत्यर्थम् प्राप्नुयात मान्सेप्सितम।

केवलं दुग्धधारा च वदा कार्या विशेषतः।

शर्करा मिश्रिता तत्र यदा बुद्धिर्जडा भवेत्।

श्रेष्ठा बुद्धिर्भवेत्तस्य कृपया शङ्करस्य च!!

सार्षपेनैव तैलेन शत्रुनाशो भवेदिह!

पापक्षयार्थी मधुना निर्व्याधिः सर्पिषा तथा।।

जीवनार्थी तू पयसा श्रीकामीक्षुरसेन वै।

पुत्रार्थी शर्करायास्तु रसेनार्चेतिछवं तथा।

महलिंगाभिषेकेन सुप्रीतः शंकरो मुदा।

कुर्याद्विधानं रुद्राणां यजुर्वेद्विनिर्मितम्।

*अर्थात-*

जल से रुद्राभिषेक करने पर —               वृष्टि होती है।
कुशा जल से अभिषेक करने पर —        रोग, दुःख से छुटकारा मिलती है।
दही से अभिषेक करने पर —                  पशु, भवन तथा वाहन की प्राप्ति होती है।
गन्ने के रस से अभिषेक  करने पर —     लक्ष्मी प्राप्ति
मधु युक्त जल से अभिषेक करने पर — धन वृद्धि के लिए।
तीर्थ जल से अभिषेकक करने पर —     मोक्ष की प्राप्ति होती है।
इत्र मिले जल से अभिषेक करने से —     बीमारी नष्ट होती है ।
दूध् से अभिषेककरने से   —                   पुत्र प्राप्ति,प्रमेह रोग की शान्ति तथा  मनोकामनाएं  पूर्ण
गंगाजल से अभिषेक करने से —             ज्वर ठीक हो जाता है।
दूध् शर्करा मिश्रित अभिषेक करने से — सद्बुद्धि प्राप्ति हेतू।
घी से अभिषेक करने से —                       वंश विस्तार होती है।
सरसों के तेल से अभिषेक करने से —      रोग तथा शत्रु का नाश होता है।
शुद्ध शहद रुद्राभिषेक करने से   —-         पाप क्षय हेतू।
इस प्रकार शिव के रूद्र रूप के पूजन और अभिषेक करने से जाने-अनजाने होने वाले पापाचरण से भक्तों को शीघ्र ही छुटकारा मिल जाता है और साधक में शिवत्व रूप सत्यं शिवम सुन्दरम् का उदय हो जाता है उसके बाद शिव के शुभाशीर्वाद सेसमृद्धि, धन-धान्य, विद्या और संतान की प्राप्ति के साथ-साथ सभी मनोकामनाएं पूर्ण हो जाते हैं।  साथ-साथ सभी मनोकामनाएं पूर्ण हो जाते हैं।

Saturday, January 27, 2018

गुरुस्तोत्रम्

_*गुरुस्तोत्रम्*_
*अखण्डमण्डलाकारं व्याप्तं येन चराचरम् ।*
*तत्पदं दर्शितं येन तस्मै श्रीगुरवे नमः ॥ १॥*

*अज्ञानतिमिरान्धस्य ज्ञानाञ्जनशलाकया ।*
*चक्षुरुन्मीलितं येन तस्मै श्रीगुरवे नमः ॥ २॥*

*गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः गुरुर्देवो महेश्वरः।* *गुरुरेव परं ब्रह्म तस्मै श्रीगुरवे नमः ॥ ३॥*

*स्थावरं जङ्गमं व्याप्तं यत्किञ्चित्सचराचरम् ।* 
*तत्पदं दर्शितं येन तस्मै श्रीगुरवे नमः ॥ ४॥*

*चिन्मयं व्यापि यत्सर्वं त्रैलोक्यं सचराचरम् ।*
*तत्पदं दर्शितं येन तस्मै श्रीगुरवे नमः ॥ ५॥*

*सर्वश्रुतिशिरोरत्नविराजितपदाम्बुजः । वेदान्ताम्बुजसूर्यो यः तस्मै श्रीगुरवे नमः ॥ ६॥*

*चैतन्यश्शाश्वतश्शान्तः व्योमातीतो निरञ्जनः ।*
*बिन्दुनादकलातीतः तस्मै श्रीगुरवे नमः ॥ ७॥*

*ज्ञानशक्तिसमारूढः तत्त्वमालाविभूषितः । भुक्तिमुक्तिप्रदाता च तस्मै श्रीगुरवे नमः ॥ ८॥*

*अनेकजन्मसम्प्राप्तकर्मबन्धविदाहिने । आत्मज्ञानप्रदानेन तस्मै श्रीगुरवे नमः ॥ ९॥*

*शोषणं भवसिन्धोश्च ज्ञापनं सारसम्पदः ।*
*गुरोः पादोदकं सम्यक् तस्मै श्रीगुरवे नमः ॥ १०॥*

*न गुरोरधिकं तत्त्वं न गुरोरधिकं तपः।*
*तत्त्वज्ञानात् परं नास्ति तस्मै श्रीगुरवे नमः ॥ ११॥*

*मन्नाथः श्रीजगन्नाथः मद्गुरुः श्रीजगद्गुरुः ।*
*मदात्मा सर्वभूतात्मा तस्मै श्रीगुरवे नमः ॥ १२॥*

*गुरुरादिरनादिश्च गुरुः परमदैवतम् ।*
*गुरोः परतरं नास्ति तस्मै श्रीगुरवे नमः ॥ १३॥*

*त्वमेव माता च पिता त्वमेव*
*त्वमेव बन्धुश्च सखा त्वमेव ।*
*त्वमेव विद्या द्रविणं त्वमेव ।*
*त्वमेव सर्वं मम देवदेव ॥ १४॥*

*🙏🏻॥ इति श्रीगुरुस्तोत्रम् ॥🙏🏻*